राजनीतिक व सामाजिक परिस्थितियों मे देश के नागरिक
Annu Kapoor | Nov 27 2008

यह लेख 9 साल पहले लिखा गया था, लेकिन आज भी प्रासंगिक है। क्रिशमश की पूर्व संध्या पर वर्ष 1999 की 24 दिसंबर को जब आतंकवादियों ने एक हवाई जहाज का अपहरण कर लिया था। आज 26 नवंबर 2008 को आतंकवादियों ने पूरे मुबंई का अपहरण कर लिया है, फिर भी हम कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अब वह दिन दूर नही है, जब ऐसे असमाजिक तत्व पूरे देश का अपहरण कर लेंगे।

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प्यारे देशवासियों
वंदे मातरम्

आप सभी को नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। यह नया वर्ष, नई सदी, नया सहस्त्र वर्ष आप सब के जीवन में शांति, अनुरूपता व खुशियां लेकर आए।

प्यारे भाईयों और बहनों, हमारी प्रिय मातृभूमि तमाम समस्याओं से जूझ रही है। हमारे देश के नागरिक आतंकवादियों द्वारा बंधक बनाए जा रहे हैं। आतंकवादियों ने सिर्फ हवाई जहाज का अपहरण नहीं किया, बल्कि उन्होंने हमारी व्यक्तिगत स्वतंत्रता व एकता का अपहरण किया है। यहां तक कि उन्होंने पूरे तंत्र को बंधक बना लिया है। हालांकि सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आठ दिनों की मानसिक, भावुक व शारीरिक यातना के बाद अपने लोगों को छुड़ा लिया। सभी को वापस लाने की कोशिशों के तहत हमने अपना एक आदमी खो दिया। लेकिन सभी की सुरक्षित वापसी की कीमत हमें कुछ अधिक देकर ही चुकानी पड़ी।

उनकी मांग के आगे हम बेबस थे और मेरा विश्वास मानए, कोई भी व्यक्ति, कोई भी सरकार इस हालत में वही करता, जो हुआ। गत 15 सालों से हम इस पुरानी व खतनाक समस्या से लड़ रहे हैं। हालांकि, अब तक अपने देश को आतंकवादी घटनाओं से निजात नहीं मिली है।
हमारे वीर जवान साथियों ने मातृभूमि के लिए अपने जान न्यौछावर कर दिए। और अब हम दुनिया के सामने एक असुरक्षित और कमजोर के राष्ट्र के रूप में जाने जाते हैं, क्योंकि हमने हमेशा कहा है कि हम एक शांतिप्रिय देश हैं। लेकिन जब शांति गहरी असुरक्षा से आती है, तब संभवतः यह शांति नहीं रह जाती, बल्कि कायरता हो जाती है। जब अमेरिका जैसा शक्तिशाली देश शांति की बात करता है तो यह विश्वासयोग्य लगता है, लेकिन जब हम शांति की बात करते हैं तो यह खोखला और बेकार लगता है, क्योंकि अंततः हम कुछ कर नहीं पाते।

हम अकेले हैं। दीवार की पर इबारत साफ है कि हमें कोई मदद नहीं कर सकता, बल्कि यह कहता है कि अपनी रक्षा खुद करो। हमारे राजनेता सिर्फ सत्ता की आकांक्षा रखते हैं साथ ही सत्ता से मिलने वाली सुख-सुविधाओं के लिए ही वह जीते हैं। इन राजनेताओं में से अधिकतर खुद अपने बारे में सोचने वाले लोग हैं। इनकी राजनीति वोट बैंक के लिए आत्मकेन्द्रित रहती है। कुछ दिनों के लिए देश के सभी हवाईअड्डों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी जाएगी, लेकिन कुछ समय बीतने के बाद एक बार फिर से इसी तरह की समस्या का सामना करना पड़ेगा।

हालांकि, मैं कहना चाहता हूं कि चिंता न करें। देश के दुश्मन फिर से षडयंत्र रच सकते हैं। वे संभवतः ट्रेनों, बसों, छोटे बच्चों सहित कई स्थानों को निशाना बना सकते हैं। यह सूची लंबी हो सकती है, लेकिन फिर भी हम उन्हें रोक सकते हैं। आतंकवादियों को रोकने के लिए हमें आगे आना होगा। हमें शांति के उस मुखौटे के निजात पानी होगी। हमें एक होना होगा और दुश्मनों से लड़ने के लिए एकता और मजबूती जरूरी है।

पाकिस्तान और तालिबान के नाम पर बार-बार आरोपों की राजनीति क्यों की जा रही है। हम अच्छी तरह जानते हैं कि हमारे दुश्मन कौन हैं और हमें इस बात को स्वीकार करना होगा। उन्हें बताना होगा। दुश्मनों को सफलता मिली है, क्योंकि हम अपनी प्राथमिकताओं का आकलन नहीं कर सके हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि हमारी प्राथमिकताओं की सूची में अपनी मातृभूमि के लिए प्रेम सबसे नीचले स्थान पर है। हालांकि हम सभी ने देशभक्ति का चोला पहन रखा है और यह कहते हुए नहीं अघाते कि हमें भारतीय होने पर गर्व है। अब हमें इस तरह के शब्दों की जरूरत नहीं है। हमें काम करना होगा। अगर हमें देश की रक्षा करनी है तो हमें एकसूत्र में बंधना होगा। दुनिया में हम भारतीयों के लिए कहीं स्थान नहीं हैं और न ही कोई भविष्य। इसलिए अब मातृभूमि व अपने सम्मान की रक्षा के लिए हमें ही आगे जाना होगा।

देश में कानून-व्यवस्था को अविलंब सुधारने की जरूरत है। सरकारी खजाने में टैक्स देने वाले आम आदमी का धन आतंकवादियों को खिलाया जा रहा है। क्यों नहीं उन्हें तुरंत सजा दी जाती।
बहुत सारी चीजें ऐसी हैं, जिनमें आमूल-चूल परिवर्तन की जरूरत है। लंबे अरसे से मैने चीजों को महसूस किया है और अब मेरा एकमात्र लक्ष्य मातृभूमि की सेवा करना है। मैं न तो एक राजनीतिज्ञ हूं, न ही एक कलाकार, न ही एक अधिकारी या नीति नियंता, लेकिन फिर भी इस देश के प्रति मेरी भी कुछ जवाबदेही बनती है।

देश की आर्थिक, राजनीतिक व सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए अपनी मातृभूमि की रक्षा में अगर कोई भी व्यक्ति थोड़ी भी रुचि रखता है, तो वह मुझसे संपर्क कर सकता है। मैं न केवल बाहरी दुश्मनों से रक्षा की बात कह रहा हूं, बल्कि अपने आसपास के उन लोगों की बात भी कह रहा हूं, जो लालच की वजह से आम आदमी का नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसलिए दुनिया के सामने अब इस बात को साबित करने का समय आ गया है कि हम भले अकेले हैं, लेकिन सम्मान के साथ जीएंगे।

हमें एकजुट होना है और यह साबित करना है कि इस देश का लहु हमारी रगों में बहता है, साथ ही हमारे देश के रगों में भी लहु है।

जयहिन्द

आपका भारतवासी
अन्नु कपूर

कृपया इसे अपने किसी प्रिय साथी को फॉरवार्ड करें और अगर लगे यह बेसिर पैर की बात हो किसी पागल की बकवास समझ कर इसे डीलीट कर दें। 850 साल से जो कौम गुलाम रही है, उसको राजनीतिक आजादी भले मिल जाए, लेकिन वह मानसिक तथा आध्यात्मिक तरीके से थोड़े ही आजाद हो जाता है।

जयहिन्द

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